Updated सम्पूर्ण Sunderkand PDF FREE Download 2023

दोस्तों आज की इस पोस्ट में हम आपको Sunderkand PDF मुफ्त में उपलब्ध कराने वाले हैं, जिसे आप नीचे दिए गए डाउनलोड नाउ बटन पर क्लिक कर आसानी से प्राप्त कर सकते हैं

जब कोई व्यक्ति सुंदरकांड पाठ करता है या सुंदरकांड Sunderkand PDF की कथा सुनता है, तो उसमें कई मानवीय भावनाएं जुड़ी होती हैं, जो उसकी आत्मा को संतुष्टि और आध्यात्मिक के साथ भर देती हैं।

Sunderkand PDF FREE Download
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Sunderkand PDF FREE Download: Details

PDF NameSunderkand PDF FREE Download
CategoryReligion
Size 40 MB
Pages160
Website Linkwww.pdfsamadhan.com
Sunder kand download in hindi
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Sunderkand PDF Download

सुंदरकांड को विस्तार पूर्वक समझने के लिए हमने यहां कुछ मानवीय भावनाओं के उदाहरण दिए गए हैं, जिन्हें सुंदरकांड (Sunderkand PDF) पाठ के माध्यम से व्यक्त किया जा सकता है:

भक्ति (Devotion): (Sunderkand PDF)

सुंदरकांड पाठ करते समय भक्त भगवान हनुमान और भगवान राम के प्रति अपनी अच्छुत भक्ति का अभिवादन करते हैं, जो उनके दिल के आस-पास होने वाली गहरी भावनाओं का प्रतीक होती है।

आशीर्वाद (Blessings):

जब हम सुबह सुंदरकांड को पाठ करने से व्यक्तिगत और पारंपरिक स्तर पर भगवान हनुमान के आशीर्वाद की प्राप्ति की इच्छा होती है, जो उनके जीवन को शुभ और सफल बनाने में मदद करती है।

शक्ति (Strength):

सुंदरकांड का पाठ व्यक्त को कार्यों के लिए आवश्यक शक्ति और साहस प्रदान करता है, इसके माध्यम से भक्त अपने जीवन के सभी मानवीय और आध्यात्मिक कार्यों के लिए आवश्यक उत्साह और उत्सव की भावना करते हैं।

यह बहुत महत्वपूर्ण हो जाता है कि सुंदरकांड का पाठ करने के पश्चात हमारे मन में एक श्रद्धा का भाव उत्पन्न होता है जिससे हमारी वर्तमान जीवन में शक्ति का प्रचलन बढ़ जाता है।

Sundar Kand PDF Download in Hindi

आपकी सुविधा के लिए हमने sunderkand path in hindi pdf को प्राप्त कराया है आप इसे पढ़ सकते हैं वह अपने फोन में सेव कर सकते हैं।

Sundar Kand Path PDF
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सुन्दरकांड, रामायण का पाँचवा अध्याय है जो हनुमानजी के साहसी कार्यों और उनके लंका में सीता की खोज के कार्य को विस्तार से वर्णन करता है।

यह पाठ हिन्दू धर्म के भक्तों के बीच भगवान हनुमान के महत्वपूर्ण भक्तिकाल का हिस्सा होता है और विभिन्न धार्मिक आयोजनों, त्योहारों और पूजा-पाठ के समय उपयोग किया जाता है।

सुन्दरकांड पाठ को हम लोगों के बीच या समूह में पढ़ा जा सकता है, और यह भगवान हनुमान के आशीर्वाद और सहायता की आशा के साथ भक्तों के जीवन में आशीर्वाद, सुरक्षा और शांति करने का एक आम प्रथा है।

Sundar kand in hindi PDF

शान्तं शाश्वतमप्रमेयमनघं निर्वाणशान्तिप्रदं,ब्रह्माशम्भुफणीन्द्रसेव्यमनिशं वेदान्तवेद्यं विभुम्‌।

नान्या स्पृहा रघुपते हृदयेऽस्मदीये,सत्यं वदामि च भवानखिलान्तरात्मा।

भक्तिं प्रयच्छ रघुपुंगव निर्भरां मे,कामादिदोषरहितं कुरु मानसं च॥२॥

अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहं,दनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यम्‌।

सकलगुणनिधानं वानराणामधीशं,रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि॥३॥

जामवंत के बचन सुहाए।सुनि हनुमंत हृदय अति भाए॥

तब लगि मोहि परिखेहु तुम्ह भाई।सहि दुख कंद मूल फल खाई॥

जब लगि आवौं सीतहि देखी।होइहि काजु मोहि हरष बिसेषी॥

यह कहि नाइ सबन्हि कहुँ माथा।चलेउ हरषि हियँ धरि रघुनाथा॥

सिंधु तीर एक भूधर सुंदर।कौतुक कूदि चढ़ेउ ता ऊपर॥

बार-बार रघुबीर सँभारी।तरकेउ पवनतनय बल भारी॥

जेहिं गिरि चरन देइ हनुमंता।चलेउ सो गा पाताल तुरंता॥

जिमि अमोघ रघुपति कर बाना।एही भाँति चलेउ हनुमाना॥

जलनिधि रघुपति दूत बिचारी।तैं मैनाक होहि श्रम हारी॥

श्री राम चरित मानस-सुन्दरकाण्ड (दोहा 1 – दोहा 6)

॥दोहा॥

हनूमान तेहि परसा कर पुनि कीन्ह प्रनाम,राम काजु कीन्हें बिनु मोहि कहाँ बिश्राम।

॥चौपाई॥

जात पवनसुत देवन्ह देखा।जानैं कहुँ बल बुद्धि बिसेषा॥

सुरसा नाम अहिन्ह कै माता।पठइन्हि आइ कही तेहिं बाता॥

आजु सुरन्ह मोहि दीन्ह अहारा।सुनत बचन कह पवनकुमारा॥

राम काजु करि फिरि मैं आवौं।सीता कइ सुधि प्रभुहि सुनावौं॥

तब तव बदन पैठिहउँ आई।सत्य कहउँ मोहि जान दे माई॥

कवनेहुँ जतन देइ नहिं जाना।ग्रससि न मोहि कहेउ हनुमाना॥

जोजन भरि तेहिं बदनु पसारा।कपि तनु कीन्ह दुगुन बिस्तारा॥

सोरह जोजन मुख तेहिं ठयऊ।तुरत पवनसुत बत्तिस भयऊ॥

जस जस सुरसा बदनु बढ़ावा।तासु दून कपि रूप देखावा॥

सत जोजन तेहिं आनन कीन्हा।अति लघु रूप पवनसुत लीन्हा॥

बदन पइठि पुनि बाहेर आवा।मागा बिदा ताहि सिरु नावा॥

मोहि सुरन्ह जेहि लागि पठावा।बुधि बल मरमु तोर मैं पावा॥

॥ दोहा 2 ॥

राम काजु सबु करिहहु तुम्ह बल बुद्धि निधान,आसिष देइ गई सो हरषि चलेउ हनुमान।

॥ चौपाई ॥

निसिचरि एक सिंधु महुँ रहई।करि माया नभु के खग गहई॥

जीव जंतु जे गगन उड़ाहीं।जल बिलोकि तिन्ह कै परिछाहीं॥

गहइ छाहँ सक सो न उड़ाई।एहि बिधि सदा गगनचर खाई॥

सोइ छल हनूमान कहँ कीन्हा।तासु कपटु कपि तुरतहिं चीन्हा॥

ताहि मारि मारुतसुत बीरा।बारिधि पार गयउ मतिधीरा॥

तहाँ जाइ देखी बन सोभा।गुंजत चंचरीक मधु लोभा॥

नाना तरु फल फूल सुहाए।खग मृग बृंद देखि मन भाए॥

सैल बिसाल देखि एक आगें।ता पर धाइ चढ़ेउ भय त्यागें॥

उमा न कछु कपि कै अधिकाई।प्रभु प्रताप जो कालहि खाई॥

गिरि पर चढ़ि लंका तेहिं देखी।कहि न जाइ अति दुर्ग बिसेषी॥

अति उतंग जलनिधि चहु पासा।कनक कोट कर परम प्रकासा॥

॥ छन्द ॥

कनक कोटि बिचित्र मनि कृत सुंदरायतना घना,चउहट्ट हट्ट सुबट्ट बीथीं चारु पुर बहु बिधि बना।

गज बाजि खच्चर निकर पदचर रथ बरूथन्हि को गनै,बहुरूप निसिचर जूथ अतिबल सेन बरनत नहिं बनै॥१॥

बन बाग उपबन बाटिका सर कूप बापीं सोहहीं,नर नाग सुर गंधर्ब कन्या रूप मुनि मन मोहहीं।

कहुँ माल देह बिसाल सैल समान अतिबल गर्जहीं,नाना अखारेन्ह भिरहिं बहुबिधि एक एकन्ह तर्जहीं॥२॥

करि जतन भट कोटिन्ह बिकट तन नगर चहुँ दिसि रच्छहीं,कहुँ महिष मानुष धेनु खर अज खल निसाचर भच्छहीं।

एहि लागि तुलसीदास इन्ह की कथा कछु एक है कही,रघुबीर सर तीरथ सरीरन्हि त्यागि गति पैहहिं सही॥३॥

॥ दोहा 3 ॥

पुर रखवारे देखि बहु कपि मन कीन्ह बिचार,अति लघु रूप धरों निसि नगर करौं पइसार।

॥ चौपाई ॥

मसक समान रूप कपि धरी।लंकहि चलेउ सुमिरि नरहरी॥

नाम लंकिनी एक निसिचरी।सो कह चलेसि मोहि निंदरी॥

जानेहि नहीं मरमु सठ मोरा।मोर अहार जहाँ लगि चोरा॥

मुठिका एक महा कपि हनी।रुधिर बमत धरनीं ढनमनी॥

पुनि संभारि उठी सो लंका।जोरि पानि कर बिनय ससंका॥

जब रावनहि ब्रह्म बर दीन्हा।चलत बिरंच कहा मोहि चीन्हा॥

बिकल होसि तैं कपि कें मारे।तब जानेसु निसिचर संघारे॥

तात मोर अति पुन्य बहूता।देखेउँ नयन राम कर दूता॥

॥ दोहा 4 ॥

तात स्वर्ग अपबर्ग सुख धरिअ तुला एक अंग,तूल न ताहि सकल मिलि जो सुख लव सतसंग।

॥ चौपाई ॥

प्रबिसि नगर कीजे सब काजा।हृदयँ राखि कोसलपुर राजा॥

गरल सुधा रिपु करहिं मिताई।गोपद सिंधु अनल सितलाई॥

गरुड़ सुमेरु रेनु सम ताही।राम कृपा करि चितवा जाही॥

अति लघु रूप धरेउ हनुमाना।पैठा नगर सुमिरि भगवाना॥

मंदिर मंदिर प्रति करि सोधा।देखे जहँ तहँ अगनित जोधा॥

गयउ दसानन मंदिर माहीं।अति बिचित्र कहि जात सो नाहीं॥

सयन किएँ देखा कपि तेही।मंदिर महुँ न दीखि बैदेही॥

भवन एक पुनि दीख सुहावा।हरि मंदिर तहँ भिन्न बनावा॥

॥ दोहा 5 ॥

रामायुध अंकित गृह सोभा बरनि न जाइ,नव तुलसिका बृंद तहँ देखि हरष कपिराई।

॥ चौपाई ॥

लंका निसिचर निकर निवासा।इहाँ कहाँ सज्जन कर बासा॥

मन महुँ तरक करैं कपि लागा।तेहीं समय बिभीषनु जागा॥

राम राम तेहिं सुमिरन कीन्हा।हृदयँ हरष कपि सज्जन चीन्हा॥

एहि सन सठि करिहउँ पहिचानी।साधु ते होइ न कारज हानी॥

बिप्र रूप धरि बचन सुनाए।सुनत बिभीषन उठि तहँ आए॥

करि प्रनाम पूँछी कुसलाई।बिप्र कहहु निज कथा बुझाई॥

की तुम्ह हरि दासन्ह महँ कोई।मोरें हृदय प्रीति अति होई॥

की तुम्ह रामु दीन अनुरागी।आयहु मोहि करन बड़भागी॥

॥ दोहा 6 ॥

तब हनुमंत कही सब राम कथा निज नाम,सुनत जुगल तन पुलक मन मगन सुमिरि गुन ग्राम।

॥ चौपाई ॥

सुनहु पवनसुत रहनि हमारी।जिमि दसनन्हि महुँ जीभ बिचारी॥

तात कबहुँ मोहि जानि अनाथा।करिहहिं कृपा भानुकुल नाथा॥

तामस तनु कछु साधन नाहीं।प्रीत न पद सरोज मन माहीं॥

अब मोहि भा भरोस हनुमंता।बिनु हरिकृपा मिलहिं नहिं संता॥

जौं रघुबीर अनुग्रह कीन्हा।तौ तुम्ह मोहि दरसु हठि दीन्हा॥

सुनहु बिभीषन प्रभु कै रीती।करहिं सदा सेवक पर प्रीति॥

कहहु कवन मैं परम कुलीना।कपि चंचल सबहीं बिधि हीना॥

प्रात लेइ जो नाम हमारा।तेहि दिन ताहि न मिलै अहारा॥

05 बिन्दु Sunderkand Book PDF के बारे में

सुंदरकांड को पढ़ने का सही तरीका:

इसे अपने पसंदीदा नायकों या रोल मॉडल के बारे में कहानियाँ पढ़ने जैसा समझें, लोग भगवान राम और भगवान हनुमान जैसे नायकों के करीब महसूस करने के लिए सुंदरकांड पढ़ते हैं, यह आपके पसंदीदा एथलीटों या फिल्मी सितारों को देखने जैसा है।

सुंदरकांड भगवान हनुमान के बारे में है, जो कुछ बहुत ही साहसी और कठिन कार्य कर रहे हैं, इसे पढ़ने से आपको साहस मिल सकता है और कठिन परिस्थितियों का सामना करने में मदद मिलेगी।

आशीर्वाद प्राप्त करना:

कुछ लोगों का मानना ​​है कि सुंदरकांड का पाठ करने से उनके देवता प्रसन्न हो सकते हैं और बदले में उन्हें आशीर्वाद या सहायता मिल सकती है, यह किसी महत्वपूर्ण घटना से पहले सौभाग्य के लिए प्रार्थना करने जैसा है।

क्या आप जानते हैं कि जब लोग जन्मदिन की मोमबत्तियाँ बुझाते हैं या शुभकामनाओं के कुएँ में एक सिक्का फेंकते हैं तो वे कैसे इच्छा करते हैं? यह कुछ-कुछ वैसा ही है।

वर्तमान जीवन में मूल्यों की सीख:

हनुमान की कहानी वफादारी, निस्वार्थता और भक्ति जैसे अच्छे मूल्यों को सिखाती है, इसे पढ़ने से आप एक बेहतर इंसान बनने और दूसरों के लिए अच्छे काम करने की इच्छा जगा सकते हैं।

यह अच्छे नैतिक पाठ वाली कहानियाँ पढ़ने जैसा है, ठीक उसी तरह जैसे परियों की कहानियों में अक्सर एक सबक होता है, जैसे “दूसरों के प्रति दयालु रहें”, सुंदरकांड का पाठ भी ऐसे ही मूल्य सिखाता है।

जब जीवन कठिनाइयां आती है, तो लोग आंतरिक शांति महसूस करने के लिए सुंदरकांड का पाठ करते हैं, यह एक सुखदायक कहानी की तरह है जो तनावग्रस्त होने पर आपके दिमाग को शांत कर देती है।

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FAQ: Sunderkand Path PDF

सुंदरकांड का पाठ करने के लिए सबसे अच्छा समय क्या है?

पाठ को करने के लिए कोई विशेष समय की आवश्यकता नहीं होती है, आपका जब मन करे तब आप सुंदरकांड का पाठ कर सकते हैं।

क्या सभी धर्म के लोग सुंदरकांड का पाठ कर सकते हैं?

जी हां, ऐसा कहीं भी नहीं लगा है कि अन्य धर्म वाले पाठ नहीं कर सकते हैं।

सुन्दरकाण्ड का पाठ करने से क्या लाभ होता है?

सुंदरकांड का पाठ करने से सकारात्मक ऊर्जा का प्रचलन होता है।

Last Words

उम्मीद है, यह आर्टिकल Sunderkand PDF आपको पसंद आया होगा और इसमें दी गई समस्त जानकारी से आप संतुष्ट होंगे, यदि आपको इस आर्टिकल Sunderkand Path PDF में कोई भी कमी नजर आती है तो आप हमें कमेंट कर अवश्य बताएं साथ ही हमें यह भी बताएं कि आपको हमारी यह जानकारी कैसी लगी

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