Shiv Chalisa PDF in Hindi and English FREE Download 2023

आज का यह पोस्ट Shiv Chalisa PDF in Hindi and English के बारे में होने वाला है, शिव चालीसा के संपूर्ण जानकारी हम आपको इस PDF के माध्यम से उपलब्ध करा रहे हैं तो कृपया इस पोस्ट को अंत तक पढ़े।

आधुनिक जीवन में, हम रोजाना तेजी से बदल रहे हैं, और इस तेजी में हम कभी-कभी अपने मानवीय भावनाओं को भूल जाते हैं। हम अपनी दिनचर्या में इतने उलझे हुए होते हैं कि कभी-कभी हमारी भावनाएं छूट जाती हैं।

इस माहौल में, हमें व्यक्तिगत संबंधों पर विशेष ध्यान देना महत्वपूर्ण है, कभी-कभी हम अपने परिवार और दोस्तों के साथ संबंधों को स्वाभाविक रूप से नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे दूरियां बढ़ सकती हैं।

Shiv Chalisa PDF in Hindi and English FREE Download 2023
Shiv Chalisa PDF in Hindi and English FREE Download 2023

एक उदाहरण से समझें – आपने शायद देखा होगा कि जब हम किसी के साथ बैठकर काम करते हैं, तो हम फोन पर या ईमेल में अधिक समय बिता देते हैं, लेकिन व्यक्तिगत बातचीत का समय कम हो जाता है। यह आपसी संबंधों को कमजोर कर सकता है और एक दूसरे के साथ सहज तालमेल बनाए रखने में रुकावट डाल सकता है।

इसलिए, हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हम अपनी भावनाओं को साझा करने के लिए समय निकालते हैं और व्यक्तिगत संबंधों को मजबूत बनाए रखने के लिए प्रयासरत रहते हैं। इससे हमारे जीवन में सुख-शांति बनी रहेगी और हम एक दूसरे के साथ संबंधों की महत्वपूर्णता को समझ सकेंगे।

Shiv Chalisa PDF: Details

PDF Name Shiv Chalisa PDF in Hindi and English
CategoryReligion
Size0.50 MB
Pages06
Website Linkwww.pdfsamadhan.com
Shiv Chalisa PDF Download NOW!
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Shiv Chalisa pdf Download now- Arti 01

Shiv Chalisa pdf Download now in Hindi: Arti 01

ॐ जय शिव ओमकारा, प्रभु जय शिव ओमकारा।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥

गंगाधर, शशिधर, सोहे, मृगधर, बालाचंद्र सोहे।
भगवन पारवती सहित, गनपति भगवान जैकारा॥

ओम जय शिव ओमकारा, प्रभु जय शिव ओमकारा।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥

चंदन मृगमय चंद्रम, चकोर बान चलाया।
माटी हे फूल, महासुखकारी, पूजा होम कथा सुनाया॥

ओम जय शिव ओमकारा, प्रभु जय शिव ओमकारा।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥

कानन कुण्डल, शोभित नासा।
वारमुद्रा धारण, खगमुद्रा छाया॥

ओम जय शिव ओमकारा, प्रभु जय शिव ओमकारा।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥

श्वेतांबर पीताम्बर, बागम्बरांगी।
रक्तांबर पारेशा, चटाम्बरांगी॥

ओम जय शिव ओमकारा, प्रभु जय शिव ओमकारा।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥

हंस आसन, गरुड़ आसन, वृषभासन धारी।
स्वानवाहन सोहत, दारुक वाहन धारी॥

ओम जय शिव ओमकारा, प्रभु जय शिव ओमकारा।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥

कार मध्ये कमण्डलु चक्र, चक्र मध्ये कमण्डलु।
रक्तांबर राजे भूजा चक्रधारी॥

ओम जय शिव ओमकारा, प्रभु जय शिव ओमकारा।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥

त्रिपुरारी त्रिकालग्नि काली काल कराली।
काल काल कर्ता, काल काल भीमी॥

ओम जय शिव ओमकारा, प्रभु जय शिव ओमकारा।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥

अब हम सभी इस आराधना में एक साथ होकर शिवजी की महिमा को गुणगान करें और उनकी कृपा से अपने जीवन को प्रेरित करें।

 ओम नमः शिवाय।

Shiv Chalisa pdf Download now in English: Arti 01

"Om Jai Shiv Omkara, Prabhu Jai Shiv Omkara.
Brahma, Vishnu, Sadashiv, Ardhangi Dhara.

Gangaadhar, Shashidhar, Sohe, Mrigadhar, Balaachandra Sohe.
Bhagwan Parvati sahit, Ganpati Bhagwan Jai Kara.

Om Jai Shiv Omkara, Prabhu Jai Shiv Omkara.
Brahma, Vishnu, Sadashiv, Ardhangi Dhara.

Chandan Mrigmay Chandram, Chakor Baan Chalaya.
Maati hey phool, Mahasukhkari, Pooja Hom Katha Sunaya.

Om Jai Shiv Omkara, Prabhu Jai Shiv Omkara.
Brahma, Vishnu, Sadashiv, Ardhangi Dhara.

Kanan Kundal, Shobhit Naasa.
Varamudra Dharan, Khagmudra Chhaya.

Om Jai Shiv Omkara, Prabhu Jai Shiv Omkara.
Brahma, Vishnu, Sadashiv, Ardhangi Dhara.

Shvetambar Peetambar, Baagambaraangi.
Raktambar Paresha, Chhatambaraangi.

Om Jai Shiv Omkara, Prabhu Jai Shiv Omkara.
Brahma, Vishnu, Sadashiv, Ardhangi Dhara.

Hans Asan, Garud Asan, Vrishabhasan Dhaari.
Swanvahan Sohat, Daruk Vahan Dhaari.

Om Jai Shiv Omkara, Prabhu Jai Shiv Omkara.
Brahma, Vishnu, Sadashiv, Ardhangi Dhara.

Kaarmadhye Kamandalu Chakra, Chakra Madhye Kamandalu.
Raktambar Raaje Bhooja Chakradhari.

Om Jai Shiv Omkara, Prabhu Jai Shiv Omkara.
Brahma, Vishnu, Sadashiv, Ardhangi Dhara.

Tripurari Trikaalagni Kaali Kaal Karaali.
Kaal Kaal Karta, Kaal Kaal Bhimi.

Om Jai Shiv Omkara, Prabhu Jai Shiv Omkara.
Brahma, Vishnu, Sadashiv, Ardhangi Dhara.

Shiv Chalisa PDF – Arti 02

Shiv Chalisa PDF FREE Download
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Shiv Chalisa PDF Arti in hindi: Arti 02

॥ दोहा ॥

जय गणेश गिरिजा सुवन,मंगल मूल सुजान।

कहत अयोध्यादास तुम,देहु अभय वरदान॥

॥ चौपाई ॥

जय गिरिजा पति दीन दयाला।

सदा करत सन्तन प्रतिपाला॥

भाल चन्द्रमा सोहत नीके।

कानन कुण्डल नागफनी के॥

अंग गौर शिर गंग बहाये।

मुण्डमाल तन क्षार लगाए॥

वस्त्र खाल बाघम्बर सोहे।

छवि को देखि नाग मन मोहे॥

मैना मातु की हवे दुलारी।

बाम अंग सोहत छवि न्यारी॥

कर त्रिशूल सोहत छवि भारी।

करत सदा शत्रुन क्षयकारी॥

नन्दि गणेश सोहै तहँ कैसे।

सागर मध्य कमल हैं जैसे॥

कार्तिक श्याम और गणराऊ।

या छवि को कहि जात न काऊ॥

देवन जबहीं जाय पुकारा।

तब ही दुख प्रभु आप निवारा॥

किया उपद्रव तारक भारी।

देवन सब मिलि तुमहिं जुहारी॥

तुरत षडानन आप पठायउ।

लवनिमेष महँ मारि गिरायउ॥

आप जलंधर असुर संहारा।

सुयश तुम्हार विदित संसारा॥

त्रिपुरासुर सन युद्ध मचाई।

सबहिं कृपा कर लीन बचाई॥

किया तपहिं भागीरथ भारी।

पुरब प्रतिज्ञा तासु पुरारी॥

दानिन महँ तुम सम कोउ नाहीं।

सेवक स्तुति करत सदाहीं॥

वेद माहि महिमा तुम गाई।

अकथ अनादि भेद नहिं पाई॥

प्रकटी उदधि मंथन में ज्वाला।

जरत सुरासुर भए विहाला॥

कीन्ही दया तहं करी सहाई।

नीलकण्ठ तब नाम कहाई॥

पूजन रामचन्द्र जब कीन्हा।

जीत के लंक विभीषण दीन्हा॥

सहस कमल में हो रहे धारी।

कीन्ह परीक्षा तबहिं पुरारी॥

एक कमल प्रभु राखेउ जोई।

कमल नयन पूजन चहं सोई॥

कठिन भक्ति देखी प्रभु शंकर।

भए प्रसन्न दिए इच्छित वर॥

जय जय जय अनन्त अविनाशी।

करत कृपा सब के घटवासी॥

दुष्ट सकल नित मोहि सतावै।

भ्रमत रहौं मोहि चैन न आवै॥

त्राहि त्राहि मैं नाथ पुकारो।

येहि अवसर मोहि आन उबारो॥

लै त्रिशूल शत्रुन को मारो।

संकट ते मोहि आन उबारो॥

मात-पिता भ्राता सब होई।

संकट में पूछत नहिं कोई॥

स्वामी एक है आस तुम्हारी।

आय हरहु मम संकट भारी॥

धन निर्धन को देत सदा हीं।

जो कोई जांचे सो फल पाहीं॥

अस्तुति केहि विधि करैं तुम्हारी।

क्षमहु नाथ अब चूक हमारी॥

शंकर हो संकट के नाशन।

मंगल कारण विघ्न विनाशन॥

योगी यति मुनि ध्यान लगावैं।

शारद नारद शीश नवावैं॥

नमो नमो जय नमः शिवाय।

सुर ब्रह्मादिक पार न पाय॥

जो यह पाठ करे मन लाई।

ता पर होत है शम्भु सहाई॥

ॠनियां जो कोई हो अधिकारी।

पाठ करे सो पावन हारी॥

पुत्र होन कर इच्छा जोई।

निश्चय शिव प्रसाद तेहि होई॥

पण्डित त्रयोदशी को लावे।

ध्यान पूर्वक होम करावे॥

त्रयोदशी व्रत करै हमेशा।

ताके तन नहीं रहै कलेशा॥

धूप दीप नैवेद्य चढ़ावे।

शंकर सम्मुख पाठ सुनावे॥

जन्म जन्म के पाप नसावे।

अन्त धाम शिवपुर में पावे॥

कहैं अयोध्यादास आस तुम्हारी।

जानि सकल दुःख हरहु हमारी॥

॥ दोहा ॥

नित्त नेम उठि प्रातः ही,पाठ करो चालीसा।

तुम मेरी मनोकामना,पूर्ण करो जगदीश॥

मगसिर छठि हेमन्त ॠतु,संवत चौसठ जान।

स्तुति चालीसा शिवहि,पूर्ण कीन कल्याण॥

Shiv Chalisa PDF Arti in English: Arti 02

॥ दोहा ॥

Jai Ganesh Girija Suvan, Mangal Mool Sujan।

Kahat Ayodhyadas Tum, Dehu Abhay Varadan॥

॥ चौपाई ॥

Jai Girija Pati Deen Dayala।

Sada Karat Santan Pritipala॥

Bhal Chandrama Sohat Neeke।

Kanan Kundal Nagphani Ke॥

Ang Gaur Shir Gang Bahaye।

Mundamal Tan Kshar Lagaye॥

Vastr Khal Baghambar Sohe।

Chhavi Ko Dekhi Nag Man Mohe॥

Maina Matu Ki Have Dulari।

Bam Ang Sohat Chhavi Nyari॥

Kar Trishul Sohat Chhavi Bhari।

Karat Sada Shatrun Kshayakari॥

Nandi Ganesh Sohe Tahan Kaise।

Sagar Madhya Kamal Hai Jaise॥

Kartik Shyam Aur Ganrau।

Ya Chhavi Ko Kahi Jaat Na Kau॥

Devan Jabahi Jay Pukara।

Tab Hi Dukh Prabhu Aap Nivara॥

Kiya Upadrav Tarak Bhari।

Devan Sab Mili Tumhin Juhari॥

Turat Shadanan Aap Pathayau।

Lavanimesh Mahan Mari Girayau॥

Aap Jalandhar Asur Sanhara।

Suyash Tumhar Vidit Sansara॥

Tripurasur San Yudh Machai।

Sabahi Kripa Kar Leen Bachai॥

Kiya Tapahin Bhagirath Bhari।

Purab Pratijna Tasu Purari॥

Danin Mah Tum Sam Koi Nahi।

Sevak Stuti Karat Sadahi॥

Ved Mahima Tum Gai।

Akath Anadi Bhed Nahi Pai॥

Prakati Uddhadhi Manthan Mein Jwala।

Jarat Surasur Bhae Viyala॥

Kini Daya Tahan Kari Sahai।

Neelkanth Tab Nam Kahai॥

Pujan Ramchandra Jab Kina।

Jeet Ke Lanka Vibhishan Dina॥

Sahas Kamal Mein Ho Rahe Dhari।

Kini Pariksha Tabahi Purari॥

Ek Kamal Prabhu Rakhavu Joi।

Kamal Nayan Pujan Chahan Soi॥

Kathin Bhakti Dekhi Prabhu Shankar।

Bhae Prasanna Diye Ichchhit Var॥

Jai Jai Jai Anant Avinashi।

Karat Kripa Sab Ke Ghatvasi॥

Dusht Sakal Nit Mohi Satavai।

Bhramat Rahon Mohi Chain Na Avai॥

Trahim Trahim Main Nath Pukaro।

Yehi Avasar Mohi Aan Ubaro॥

Lai Trishul Shatrun Ko Maro।

Sankat Te Mohi Aan Ubaro॥

Mat Pita Bhrata Sab Hoi।

Sankat Mein Puchhat Nahin Koi॥

Swami Ek Hai Aas Tumhari।

Aay Harahu Mam Sankat Bhari॥

Dhan Nirdhan Ko Det Sada Hi।

Jo Koi Jaanche So Phal Pahi॥

Astuti Kehi Vidhi Karain Tumhari।

Kshama Hu Nath Ab Chook Hamari॥

Shankar Ho Sankat Ke Nashan।

Mangal Karan Vighn Vinashan॥

Yogi Yati Muni Dhyan Lagave।

Sharad Narad Shish Navaave॥

Namo Namo Jay Namah Shivaya।

Sur Brahmaadik Paar Na Paaya॥

Jo Yah Path Kare Man Laai।

Ta Par Hot Hai Shambhu Sahai॥

Rinyan Jo Koi Ho Adhikari।

Path Kare So Pavan Haari॥

Putr Hon Kar Iccha Joi।

Nischay Shiv Prasad Tehi Hoi॥

Pandit Trayodashi Ko Laave।

Dhyan Purvak Hom Karaave॥

Trayodashi Vrat Kare Hamesha।

Take Tan Nahin Rahai Kalesha॥

Dhoop Deep Nivedya Chadhave।

Shankar Sammukh Path Sunave॥

Janm Janm Ke Paap Nasaave।

Ant Dhaam Shivapur Mein Paave॥

Kahain Ayodhyadas Aas Tumhari।

Jani Sakal Dukh Harahu Hamari॥

॥ दोहा ॥

Nitta Nem Uthi Pratah Hi, Path Karo Chalisa।

Tum Meri Manokamana, Purna Karo Jagadish॥

Shiv Chalisa PDF Hindi and English: Video

Shiv Chalisa PDF Hindi and English

FAQ: Shiv Chalisa PDF Hindi and English

शिव चालीसा को पढ़ने के क्या फायदे हैं?

शिव चालीसा का पाठ करने से मानसिक शांति, ध्यान, और भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है।

शिव चालीसा कितनी भाषाओं में उपलब्ध है?

संस्कृत, हिंदी, अन्य सभी स्थानीय भाषाओं में उपलब्ध है।

शिव चालीसा का पाठ कितने बार करना चाहिए?

कम से कम दो दिन में दो बार चालीसा का पाठ करना चाहिए।

Last Words

इस पोस्ट के माध्यम से हमने आपको Shiv Chalisa PDF in Hindi and English को मुफ्त में उपलब्ध कराया है उम्मीद है आपको यह Shiv Chalisa PDF in Hindi पसंद आई होगी यदि आपको पीडीएफ में कोई भी त्रुटि या समस्या नजर आती हो तो आप हमें कमेंट कर अवश्य बताएं।

धन्यवाद

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