15+ Hindi Moral Stories For Childrens FREE PDF Download

आज के इस आर्टिकल में हम आपको Hindi Moral Stories For Childrens PDF निशुल्क उपलब्ध कराने वाले हैं, जिसे आप आसानी से FREE में Download कर सकते हैं।

हिंदी Moral Stories For Childrens बच्चों के विकास में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, बच्चे कहानी सुनके सोचना, समझना, प्रकट करना, नैतिक रहना, भाषा कौशल, और मूल्यों को सीखते हैं, जिससे बच्चे खुद से सोचना व समझना सीख लेते हैं तथा यह उनकी शारीरिक का मानसिक प्रगति में मदद करती है।

Hindi Moral Stories For Childrens
Hindi Moral Stories For Childrens

आजकल के बच्चे कहानियों में कम, मोबाइल फोन, टीवी, में ज्यादा रुचि लेते हैं, ऐसे में बहुत ही महत्वपूर्ण हो जाता है, कि बच्चों को Hindi Moral Stories को सुनाया जाए जिससे, बच्चों के अंदर भावनात्मक विकास की प्रगति हो व वह अपने आने वाली अवस्था में पूर्ण रूप से प्रतिभाग ले सके।

इसी दुविधा को देखते हुए, हमने बच्चों के लिए Moral Stories For Childrens की एक PDF तैयार की है, जिसे आप बच्चों को अवश्य पढाऐ, और बच्चों के भावों पर अपनी नजर रखें, जिससे आपको यह समझने में मदद मिलेगी,कि बच्चा किस प्रकार की काहनियो में रुचि रखता है।

Moral Stories For Childrens in Hindi PDF Free Download

टेबल के नीचे दिए गए Download Now बटन पर क्लिक कर, आप Moral Stories For Childrens की PDF को आसानी से डाउनलोड कर सकते हैं।

PDF Name 20+ Hindi Moral Stories For Childrens
CategoryEducation(Moral Stories)
Size0.50 MB
Pages06
Age02-07
Website Linkwww.pdfsamadhan.com
Download LinkAvailable
Moral Stories For Children PDF
DOWNLOAD NOW

Moral Stories For Children in Hindi

1. चींटी और टिड्डे की कहानी:

चींटी और टिड्डा बहुत अच्छे दोस्त थे, टिड्डा अपना दिन सोने या गिटार बजाने में बिताता था जबकि चींटी भोजन इकट्ठा करती थी और अपना चींटी का पहाड़ बनाती थी।

तो बीच-बीच में टिड्डा चींटी को आराम करने के लिए बोलता था, पर चींटी मन कर देती थी और वह अपना काम करती रहती थी।

थोड़े दिनों बाद, सर्दियों आ जाती है, और रात में ठंड पड़ने लगती है।

एक दिन चीटियों की टोली मक्के के दोनों को सुखाने में लगी थी, तो उन्होंने देखा एक टिड्डा जो बेहद कमजोर और भूखा था चींटी के पास आया और उसने पूछा,

“क्या आप कृपया मुझे मक्के का एक दाना दे सकती हैं?”

चींटी बोली, “हमने पूरी गर्मियों में मेहनत करके इस मकई को पाया है, और आप आराम कर रहे थे, तो हम इसे आपको क्यों दें?”

पूरी गर्मियों में टिड्डे ने कुछ भी काम नहीं किया और वह सिर्फ गाना गाता रहा और सोता रहा, जबकि चीटियों ने अपने लिए भोजन इकट्ठा किया, टिड्डे को अपनी गलती का एहसास हुआ और वह उदास होकर वापस खेतों में चला गया।

तो इस कहानी से आपको क्या सीख मिली?

जब तक आपके पास अवसर हैं, उसका उपयोग करें और काम चोरी ना करें।

2. लोमड़ी और सारस की कहानी:

एक बार एक लोमड़ी और एक सारस थे। लोमड़ी मतलबी, स्वार्थी थी। लेकिन उसने सारस को अपने घर रात में खाना खाने के लिए बुलाया।

सारस को जब यह पता चला के लोमड़ी बहन ने उसे खाने पर बुलाया है, तो उसे बहुत खुशी हुई और वह समय पर खुशी-खुशी लोमड़ी के घर खाना खाने के लिए पहुंच गया।

लोमड़ी ने देखा के सारस भाई आ रहा है, लोमड़ी बहुत खुश हुई और भाग कर गई दरवाजा खोला और उसे अंदर बुलाया वे दोनों मेज पर बैठ गए,

लोमड़ी ने सारस को सुराही में खाना परोसा और अपने लिए कटोरे में खाना परोसा, लोमड़ी ने अपना खाना खा लिया जबकि सारस उसे नहीं खा पा रहा था,

क्योंकि उसकी सोच लंबी थी और सुराही बहुत उथली थी। 

अगले दिन सारस भाई ने, लोमड़ी बहन को रात में खाने पर बुलाया, अब सारस भाई ने अपने लिए फूलदान में खाना परोसा जब की लोमड़ी बहन के लिए सुराही में खाना भरोसा, सारस ने अपना खाना खा लिया जबकि लोमड़ी सुराही में खाना नहीं खा पा रही थी, 

लोमड़ी को अपनी गलती का एहसास हुआ और वह मुंह लटकाए अपने घर वापस चली गई।

तो इस कहानी से आपको क्या सीख मिली?

स्वार्थी बन्ना बुरी बात है, और यह आपके पास वापस आएगा।

3. बंदर और मगरमच्छ की कहानी:

नदी के तट पर एक बेर का पेड़ था उस बेर के पेड़ पर एक बंदर रहता था।

एक बार वह बेर खा रहा था तभी उसने एक मगरमच्छ को देखा जो भूखा था और थका हुआ लग रहा था, 

उसने मगरमच्छ से पूछा, “मगरमच्छ भाई क्या आपको भूख लगी है”

मगरमच्छ बोला “हां, बंदर भाई मैंने पांच दिनों से कुछ भी नहीं खाया क्या आप मुझे कुछ बेर दे सकते हो”

बंदर ने मगरमच्छ को बेर दे दिए, और वे दोनों अच्छे दोस्त बन गए।

अब मगरमच्छ को जब भी भूख लगती तो वह बंदर भाई के पास जाकर बेर मांग लेता और खा लेता था।

एक दिन बंदर ने मगरमच्छ को अपनी पत्नी के पास ले जाने के लिए अतिरिक्त बेर भी दिए, 

मगरमच्छ की पत्नी को बेर बहुत पसंद आए और वह मगरमच्छ से बोली, की बंदर के दिए हुए बेर इतने स्वादिष्ट हैं, तो बंदर का दिल खाने में कितना लजीज होगा, और वह बंदर का दिल खाने की जिद करने लगी।

वह एक दुष्ट और चालाक महिला थी। मगरमच्छ परेशान था, लेकिन उसने फैसला किया कि उसे अपनी पत्नी को खुश करने की जरूरत है।

अगले दिन मगरमच्छ बंदर के पास गया और बोला कि उसकी पत्नी ने उसे खाने पर बुलाया है।

मगरमच्छ बंदर को अपनी पीठ पर बैठाकर नदी के उस पार ले गया, और उसने बंदर को अपनी पत्नी की योजना बताई,

बंदर ने तुरंत सोचा और बोला “मगरमच्छ भाई मैं अपना दिल तो बेर के पेड़ पर ही छोड़ आया हूं , हमें वापस चलना चाहिए।

पेड़ पर पहुंचते ही बंदर बोला “अरे मगरमच्छ भाई दिल तो हमारे शरीर के अंदर होता है पेड़ पर नहीं” और बंदर जोर से हँसा हा-हा-हा

और फिर बंदर बोला, मगरमच्छ भाई तुम मुझे धोखा दे रहे थे, आज से हमारी दोस्ती खत्म हो गई है और मगरमच्छ निराश होकर पानी में वापस चला गया।

तो इस कहानी से आपको क्या सीख मिली?

जो आप पर विश्वास करते हैं उन्हें कभी धोखा नहीं देना चाहिए।

4. कछुआ ख़रगोश की कहानी:

एक बार की बात है, एक घने जंगल में एक खरगोश रहता था। जिसे अपने तेज दौड़ने पर बहुत ज्यादा घमंड था उसे जंगल में जो दिखता था वह उसे चुनौती देता था कि मुझे दौड़ में हार कर दिखाओ,

जंगल में दूसरे जानवरों के बीच जाकर अपनी तारीफ करता था और कई बार दूसरों का मजाक उड़ाता था।

एक बार उसने एक कछुए को दिखा उसकी धीमी चाल को देखते हुए खरगोश ने कछुए से मजाक में बोला कछुआ भाई क्या तुम मुझे दौड़ में हरा सकते हो?

कछुआ बोला “हां खरगोश भाई मैं तुम्हें दौड़ में हरा दूंगा” यह सुनकर खरगोश ठहाके मार के ऐसा और बोला चलो देखते हैं, कौन किसको हराता है।

जब यह बात जंगल में जानवरों को पता चली, तो जानवरों में अफरा-तफरी मच गई और सब लोग कछुए खरगोश की दौड़ को देखने के लिए जमा हो गए।

दौड़ शुरू हुई, खरगोश तेजी से दौड़ने लगा और कछुए से आगे निकल गया, जबकि कछुआ अपनी धीमी चाल से आगे बढ़ रहा था।

थोड़ी दूर पहुंचने के बाद खरगोश ने पीछे मुड़कर देखा, तो उसे कछुआ नजर नहीं आया।

खरगोश ने सोचा, ” कछुआ तो बहुत धीरे चलता है, उसे यहां तक आने में घंटे लग जाएंगे , क्यों ना मैं तब तक आराम कर लूं?

यह सोचते हुए वह एक पेड़ के नीचे आराम करने के लिए लेट गया,

पेड़ के नीचे, ठंडी हवा लगी और वह गहरी नींद में सो गया, उसको पता भी नहीं चला के कछुआ कब धीरे-धीरे बिना रोक अपने लक्ष्य तक पहुंच गया।

उसकी जीत देखकर, बाकि जानवरों ने जोरो से चिल्लाना शुरू कर दिया और तालियां बजाने लगे।

तालिया की आवाज सुनकर खरगोश की नींद खुली और वह दौड़कर आखिरी सीमा तक पहुंचा, तो उसने देखा कि कछुए को सभी जानवर बधाई दे रहे हैं।

खरगोश कोई एहसास हुआ कि अगर उसने, उसे पेड़ के नीचे आराम ना किया होता तो वह आज यह दौड़ जीत जाता।

खरगोश मायूस होकर अपने घर वापस चला गया।

तो इस कहानी से आपको क्या सीख मिली?

जो धैर्य रखकर धीरे-धीरे अपने लक्ष्य की ओर बढ़ता रहता है उसे सफलता अवश्य प्राप्त होती है और जिन्हें खुद पर घमंड होता है उनका घमंड एक दिन जरूर टूटता है।

5. हाथी और उसके दोस्त की कहानी:

एक अकेला हाथी, जिसका कोई दोस्त नहीं था एक दिन वह दोस्तों की तलाश में जंगल चला गया।

उसने वहां पेड़ पर एक बंदर को दिखा और पूछा, बंदर भाई “क्या हम दोस्त बन सकते हैं?”

बंदर बोला ” हाथी भाई तुम तो बहुत बड़े हो, मेरी तरह पेड़ों पर उछल कूद नहीं कर सकते, तो मैं तुम्हारा दोस्त कैसे बन सकता हूं।

हाथी निराश होकर आगे बढ़ गया, उसने देखा की एक खरगोश सामने गाजर खा रहा है, हाथी बोला, खरगोश भाई ” क्या तुम मेरे दोस्त बनोगे?”

खरगोश बोला, हाथी भाई ” तुम मेरे दिल में नहीं घुस पाओगे तो मैं तुम्हें दोस्त कैसे बनाऊं, मैं तुम्हारा दोस्त नहीं बन सकता।

यह सुनकर हाथी बहुत दुखी हुआ, लेकिन उसे एक दोस्त चाहिए था और वह उसी की खोज में आगे बढ़ गया।

थोड़ी दूर चलते चलते हाथी को प्यास लगी और वह नदी के किनारे जाकर पानी पीने लगा, तभी उसे वहां एक मेंढक दिखा।

हाथी ने पूछा मेंढक भाई “क्या तुम मेरे दोस्त बनोगे”

मेंढक बोला, हाथी भाई ” आप तो बहुत भारी हो, और आप मुझसे बड़े भी हो तो मैं आपको अपना दोस्त कैसे बनाऊं मैं आपको अपना दोस्त नहीं बन सकता मुझे माफ करो”

हाथी यह सुनकर हैरान रह गया और मायूस होकर, आगे बढ़ गया।

हाथी ऐसे ही बहुत सारे जानवरों से बारी-बारी से पूछता हुआ, चला रहा और दिन बीत गया लेकिन उसे किसी ने अपना दोस्त नहीं बनाया।

अगले दिन, हाथी ने जंगल के सभी जानवरों को डर के मारे भागते देखा, उसने एक भालू को रोका औरपूछा कि सभी जानवर इधर-उधर क्यों भाग रहे हैं? भालू ने बताया कि जानवरों पर हमला हुआ है।

हाथी ने देखा, सभी जानवरों पर एक बाघ ने हमला किया है। यह देखकर हाथी तुरंत भाग से लड़ने के लिए आगे गया और उसने बाग को लात मारी भाग डरकर भाग गया।

सभी जानवर हाथी की तरफ देखने लगे और हाथी की बहादुरी की चर्चा करने लगे, उसके बाद सभी हाथी के दोस्त बन गए।

तो इस कहानी से आपको क्या सीख मिली?

दोस्त छोटा हो या मोटा हो उससे फर्क नहीं पड़ता दोस्त होना चाहिए वह सही समय में काम आते हैं।

6. भालू और उसके दोस्त की कहानी:

एक दिन, दो दोस्त जंगल से गुजर रहे थे, वे जानते थे कि जंगल एक खतरनाक जगह है और कुछ भी हो सकता है।

इसलिए, उन्होंने किसी भी खतरे की स्थिति में एक-दूसरे के करीब रहने का वादा किया।

अचानक, एक बड़ा भालू उनके पास आया।

एक दोस्त जल्दी से पास के एक पेड़ पर चढ़ गया और दूसरे दोस्त को पीछे छोड़ दिया।

दूसरे दोस्त को नहीं पता था कि कैसे चढ़ना है, और इसके बजाय उसने बुद्धि का इस्तेमाल किया।

वह ज़मीन पर लेट गया और मृत होने का नाटक करते हुए, बेहोश होकर वहीं पड़ा रहा।

भालू जमीन पर लेटे हुए दोस्त के पास पहुंचा, भालू ने धीरे-धीरे फिर से भटकने से पहले अपने कान को सूंघना शुरू कर दिया

क्योंकि भालू कभी भी मरे हुए लोगों को नहीं छूते, जल्द ही, पेड़ पर छिपा हुआ दोस्त नीचे आ गया।

उसने अपने दोस्त से पूछा, “मेरे प्यारे दोस्त, भालू ने तुम्हें कौन सा रहस्य बताया?” मित्र ने उत्तर दिया, “भालू ने मुझे बस यही सलाह दी कि झूठे मित्र पर कभी विश्वास मत करना”

तो इस कहानी से आपको क्या सीख मिली?

कभी भी धोखेबाजों को दोस्त नहीं बनना चाहिए।

FAQ- Hindi Moral Stories For Childrens

बच्चों के लिए कहानियाँ क्यों महत्वपूर्ण हैं?

कहानियाँ चरित्र विकास, भाषा कौशल और मूल्यों के निर्माण में मदद करती हैं।

हिंदी कहानियाँ मैं क्या विशेषता होती है?

हिंदी कहानी भावनात्मक रूप से संपूर्ण होते हैं।

कहानी कहने में भावनात्मक संबंध क्यों महत्वपूर्ण हैं?

भावनात्मक संबंध से बच्चा और मन लगाकर कहानी सुनता है और सीखना है।

अंतिम शब्द

यह थी संपूर्ण जानकारी Hindi Moral Stories For Childrens के बारे में यदि आपको, PDF डाउनलोड करने में कोई भी समस्या आती हो तो आप हमें कमेंट कर बताएं और हमें यह भी बताएं कि आपको हमारी कहानी short stories कैसी लगी, उम्मीद है यह moral stories for childrens in hindi pdf कहानी बच्चों को पसंद आएगी।

यदि आप इसी प्रकार की कहानी (Story For Kids in Hindi Pdf) और भी पढ़ना चाहते हैं तो आप हमें सोशल मीडिया पर फॉलो कर सकते हैं और हमारे इस पेज को सब्सक्राइब कर सकते हैं।

धन्यवाद

Also read,